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सूखी डाली extract viii -ix

​सूखी डाली (एकांकी संचय) — अभ्यास पुस्तिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ​अभ्यास पुस्तिका: प्रश्न-शृंखला (VIII) ​उद्धरण: "बड़प्पन बाहर की वस्तु नहीं, बड़प्पन तो मन का होना चाहिए; और फिर बेटा, घृणा को घृणा से नहीं मिटाया जा सकता।" ​(क) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए तथा कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। ​उत्तर: इस कथन के वक्ता परिवार के मुखिया दादा मूलराज हैं और श्रोता उनका मंझला (दूसरा) पुत्र कर्मचंद है। ​संदर्भ: दादा मूलराज एक अत्यंत बुद्धिमान और दूरदर्शी व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से पूरे संयुक्त परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखा है। कर्मचंद उनका आज्ञाकारी पुत्र है। जब कर्मचंद अपने पिता से कहता है कि छोटी बहू (बेला) इस घर के लोगों से घृणा करती है और अपने मायके को ही श्रेष्ठ समझती है, तब दादा मूलराज उसे पारिवारिक सामंजस्य का पाठ पढ़ाते हुए यह बात समझाते हैं। ​(ख) वक्ता और श्रोता का संबंध स्पष्ट करते हुए वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। ​उत्तर: वक्ता (दादा मूलराज) और श्रोता (कर्मचंद) के बीच पिता-पुत्र का संबंध है। ​दादा मूलराज के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ: ​दूरदर्श...

संस्कार और भावना

संस्कार और भावना' एकांकी का उद्देश्य मानव की विचारधारा में परिवर्तन लाना है। रूढ़ियों को मानना तभी तक उचित है जब तक वह बंधन न लगे वरना इनका टूट जाना ही उचित है। संस्कारों को अवश्य मानना चाहिए लेकिन उसका दास नहीं बनना चाहिए। परिवर्तन संसार का नियम है और उसे पुराने की दुहाई देकर गलत नहीं ठहराना नहीं चाहिए।

ICSE हिंदी- एकांकी संचय. एकांकी ’दीपदान’ एकांकीकार -डॉ रामकुमार वर्मा.

ICSE हिंदी- एकांकी संचय.   एकांकी ’दीपदान’  एकांकीकार -डॉ रामकुमार वर्मा.                                                  इस एकांकी को पढ़ने से पहले हमें मेवाड़ के इतिहास को थोड़ा जानना जरूरी हो जाता है | मेवाड़ में सिसोदिया वंश की स्थापना  राणा हमीर सिंह ने की थी और इसी सिसोदिया वंश में पैदा हुए थे -राणा सांगा | राणा सांगा राणा रायमल के पुत्र थे | राणा सांगा के तीन पुत्र थे --रतन सिंह, विक्रमादित्य और उदय सिंह | राणा सांगा के निधन के बाद रतन सिंह मेवाड़ के शासक बने, जो 1528 से लेकर के 1531 तक मेवाड़ के शासक रहे | रतन सिंह की मृत्यु के बाद विक्रमादित्य मेवाड़ के शासक बनते हैं | 1531 दे 1536 तक मेवाड़ पर शासन रहते हैं | 1536 में एक घटना घटी, जिसका उल्लेख करना जरूरी है | राणा सांगा की मृत्यु के बाद कुछ दिनों बाद रानी कर्णावती जौहर कर लेती है...

DEEPDAN EXTRACT IX AND X ANSWERS BY - AVADH BIHARI

  (IX)     "चली गई ऐसा मैं नहीं सुन सकूंगी | जो मुझे करना है वह सामली  सुन भी न सकेगी |भवानी तूने मेरे को कैसा कर दिया ?  मुझे बल दो कि मैं राजवंश की रक्षा में अपना रक्त दे सकूं"                                                                                                       (क) उपर्युक्त कथन किसने और किस संदर्भ में कहा है ?उत्तर-  उपर्युक्त कथन पन्नाधाय ने स्वयं सेे कहा है | यह पन्ना का स्वगत कथन है |  सामली के पूछने पर पन्नाधाय उदय सिंह के स्थान पर अपने पुत्र चंदन को बनवीर की तलवार नीचे सुला देने की बात कहती है , जिसे सामली सुन भी नहीं पाती है | इसी संदर्भ में पन्ना यह कथन कहती है |                              ...

उद् यमी नर

प्रश्‍न: आपके अनुसार स्वर्ग से क्या तात्पर्य है ? धरती को स्वर्ग कौन और कैसे बना सकता है ? उत्तर-उद्‌यमी नर कविता में स्वर्ग से तात्पर्य ऐसे स्थान से है जहाँ सभी को समान रूप से अपने परिश्रम का फल मिलता है, जहाँ हर तरह की सुख-सुविधाएँ हों। जहाँ मानव शांतिपूर्वक जीवन यापन करे। धरती को स्वर्ग मानव अपनी मेहनत द्‌वारा बना सकता है। जिस तरह से वैज्ञानिकों ने अपनी मेहनत के बल पर नए-नए अनुसंधानों की खोज की और हम मानवों को सुख-सुविधाएँ प्रदान की, ठीक इसी तरह से हम भी पृथ्‍वी को स्वर्ग बनाने में अपनी भूमिका अदा कर सकते हैं।यदि समाज में शोषण समाप्त होकर समानता का आदर्श स्थापित हो तो धरती स्वर्ग से भी सुन्दर बन  सकती है। प्रश्‍न – ईश्‍वर द्‌वारा छिपाए तत्‍व को कौन, किस प्रकार पा सकता है ? प्रकृति किससे हारती है ? उत्तर-ईश्‍वर द्‌वारा छिपाए तत्‍व को कर्मशील प्राणी अपने कर्मों, परिश्रम एवं संघर्षों के द्‌वारा पा सकता है।ये उन लोगों को प्राप्त नहीं हो सकते जो मेहनत नहीं करना चाहते।  अपनी भुजाओं की शक्ति से मनुष्य ने पृथ्वी में छिपे अपने सुख के सभी तत्वों को खोज निकाला है। कवि के शब्दों म...

पुस्तकालय का महत्त्व

पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं। वास्तव में यह सत्य भी है क्योंकि पुस्तकें ही हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाकर हमारे जीवन का उद्धार करती हैं। एक  पुस्तक  जिसमें ज्ञान की अनेक बातें होती हैं, उसे पढ़कर हमेशा हम कुछ ना कुछ नया अवश्य सीखते हैं और अपने जीवन में ज्ञान अर्जित करते रहते हैं। अनंत विषयों पर अनंत पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिसे पढ़कर मनुष्य ज्ञानी बन सकता है परंतु हर पुस्तक को खरीद पाना संभव नहीं है इसलिए पुस्तकालय बनाए जाते हैं। पुस्तकालय वह स्थान होता है जहां सैकड़ों विषयों की सैकड़ों  पुस्तक  रखी होती हैं। कोई भी व्यक्ति पुस्तकालय में आकर अपनी मनपसंद पुस्तकों का अध्ययन कर सकता है। इसमें लेश मात्र भी संदेह नहीं है कि पुस्तकालय ज्ञान का वह मंदिर है जहां जाने पर आप अनंत ज्ञान की प्राप्ति कर सकते हैं। मनुष्य अपने मन में उठे प्रश्नों का तर्कपूर्ण उत्तर इस ज्ञान के मंदिर में आकर प्राप्त कर सकता है। पुस्तकालय में रखी पुस्तकें हमारे सभी प्रश्नों का ना केवल तर्कपूर्ण उत्तर देती है बल्कि इसके अतिरिक्त हमारे ज्ञान को भी बढ़ाती हैं। पुस्तकालय में प्रवेश करने के पश्चात...

प्रमुख बिन्दु... 4 भीड़ मे खोया आदमी

प्रमुख बिन्दु... 3 भीड़ मे खोया आदमी

प्रमुख बिन्दु..... 2 भीड़ मे खोया आदमी

प्रमुख बिन्दु ....भीड़ मे खोया आदमी

पात्र चरित्र

भीड़ में खोया आदमी उद्देश्य और शीर्षक की सार्थकता

भीड़ में खोया आदमी

साहित्य सागर कहानी 4 नेताजी का चश्मा महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

  साहित्य सागर कहानी 4 नेताजी का चश्मा                                                                                             महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर                                                                                                                                        प्रश्न 1.                                  ...

DEEPDAN EXTRACT VI TO VIII ANSWERS BY AVADH BIHARI

  ( vi)"बिलासी और अत्याचारी राजा कभी निष्कंटक राज्य नहीं कर सकता"                                                             ( क) वक्ता और श्रोता कौन कौन है?  परिचय दीजिए ?कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए |                                         उत्तर- वक्ता पन्ना धाय है और श्रोता सामली है | पन्ना धाय महाराणा सांगा के सबसे छोटे पुत्र उदयसिंह की धाय और संरक्षिका है | वह अत्यंत साहसी, कर्तव्यनिष्ठ, स्वामी भक्त और देशभक्त है | सामली महल की परिचारिका है |                      ...

दीपदान work book answers extract 1-5 ( by -AVADH BIHARI)

    दीपदान work book answers extract 1-5 1 "धाय मॉं, देखो न कितनी सुंदर सुंदर लड़कियां नाच रही हैं गीत गाती हुई तुलजा भवानी के सामने नाच रही हैं |  चलो देखो न |"                                                                                                                         ...

सुखी डाली अभ्यास पुस्तिका extract - XV TO XVIII -ANSWERS

    प्रश्न  (XV) सुखी डाली अभ्यास पुस्तिका                                                                                                   " मैं किन लोगों में आ गई हूं ? ये कैसे लोग हैं कुछ भी तो समझ नहीं सकी …..आज कुछ है कल कुछ …..पल में तोला पल में माशा…... कुछ भी तो पता नहीं चलता  | गर्म होते हैं तो आग बन जाते हैं और नरम होते हैं तो मोम से भी कोमल दिखाई देते हैं | आज जिस बात को बुरा कहते हैं | कल उसी की प्रशंसा करते हैं |"                                                   ...