सूखी डाली (एकांकी संचय) — अभ्यास पुस्तिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर अभ्यास पुस्तिका: प्रश्न-शृंखला (VIII) उद्धरण: "बड़प्पन बाहर की वस्तु नहीं, बड़प्पन तो मन का होना चाहिए; और फिर बेटा, घृणा को घृणा से नहीं मिटाया जा सकता।" (क) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए तथा कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। उत्तर: इस कथन के वक्ता परिवार के मुखिया दादा मूलराज हैं और श्रोता उनका मंझला (दूसरा) पुत्र कर्मचंद है। संदर्भ: दादा मूलराज एक अत्यंत बुद्धिमान और दूरदर्शी व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से पूरे संयुक्त परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखा है। कर्मचंद उनका आज्ञाकारी पुत्र है। जब कर्मचंद अपने पिता से कहता है कि छोटी बहू (बेला) इस घर के लोगों से घृणा करती है और अपने मायके को ही श्रेष्ठ समझती है, तब दादा मूलराज उसे पारिवारिक सामंजस्य का पाठ पढ़ाते हुए यह बात समझाते हैं। (ख) वक्ता और श्रोता का संबंध स्पष्ट करते हुए वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। उत्तर: वक्ता (दादा मूलराज) और श्रोता (कर्मचंद) के बीच पिता-पुत्र का संबंध है। दादा मूलराज के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ: दूरदर्श...
संस्कार और भावना' एकांकी का उद्देश्य मानव की विचारधारा में परिवर्तन लाना है। रूढ़ियों को मानना तभी तक उचित है जब तक वह बंधन न लगे वरना इनका टूट जाना ही उचित है। संस्कारों को अवश्य मानना चाहिए लेकिन उसका दास नहीं बनना चाहिए। परिवर्तन संसार का नियम है और उसे पुराने की दुहाई देकर गलत नहीं ठहराना नहीं चाहिए।